साहित्य की उन्नति के लिए सभाओं और पुस्तकालयों की अत्यंत आवश्यकता है। - महामहो. पं. सकलनारायण शर्मा।

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प्रेमचन्द और हिंदी

प्रेमचन्द उर्दू का संस्कार लेकर हिन्दी में आए थे और हिन्दी के महान लेखक बने। हिन्दी को अपना खास मुहावरा और खुलापन दिया। कहानी और उपन्यास दोनो में युगान्तरकारी परिवर्तन पैदा किए। उन्होने साहित्य में सामयिकता प्रबल आग्रह स्थापित किया। प्रेमचंद से पहले हिंदी साहित्य राजा-रानी के किस्सों, रहस्य-रोमांच में उलझा हुआ था। प्रेमचंद ने साहित्य को सच्चाई के धरातल पर उतारा।

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भारत-दर्शन संकलन

 


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मार्च महीने का नामकरण

रोमन देवता मार्स के नाम पर मार्च महीने का नामकरण हुआ और इसे मार्च नाम से पुकारा जाने लगा। रोमन वर्ष का प्रारंभ इसी मास से होता था। मार्स मार्टिअस का अपभ्रंश है जो आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है अत: युद्ध की बहाली का समय। सर्दियां समाप्त होने पर शत्रु देश पर आक्रमण किए जाते थे।

45 ई. पू. तक रोम साम्राज्य में जो रोमन कलैंडर प्रचलित था वह 1 मार्च से प्रारंभ होता था और वर्ष में केवल 10 माह होते थे- मार्टिअस, एप्रिलिस, मेअस, जूनिअस, क्विंटिलिस, सैक्सिटिलिस, सेप्टेंबर, अक्टूबर, नवंबर तथा दिसंबर।  [भारत-दर्शन संकलन]


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अप्रैल महीने का नामकरण

अप्रैल महीने की उत्पत्ति लैटिन शब्द *ऑपिरिरे* (Aperire) से हुई। इसका अर्थ है खुलना। रोम में इसी माह कलियाँ खिलकर फूल बनती थीं अर्थात बसंत का आगमन होता था इसलिए प्रारंभ में इस माह का नाम एप्रिलिस रखा गया। इसके पश्चात वर्ष के केवल दस माह होने के कारण यह बसंत से काफी दूर होता चला गया। वैज्ञानिकों ने पृथ्वी के सही भ्रमण की जानकारी से दुनिया को अवगत कराया तब वर्ष में दो महीने और जोड़कर एप्रिलिस का नाम पुनः सार्थक किया गया।

1582 से पहले अप्रैल महीन में 29 दिन होते थे। 1582 में इसमें एक और दिन जोड़कर इसे 30 दिन का महीना बनाया गया था। [भारत दर्शन संकलन]

 


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