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कविताएं

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अँधेरे में  - गजानन माधव मुक्तिबोध | Gajanan Madhav Muktibodh

जिंदगी के...
कमरों में अँधेरे
लगाता है चक्कर
कोई एक लगातार;
आवाज पैरों की देती है सुनाई
बार-बार... बार-बार,
वह नहीं दीखता... नहीं ही दीखता,
किंतु वह रहा घूम
तिलस्मी खोह में गिरफ्तार कोई एक,
भीत-पार आती हुई पास से,
गहन रहस्यमय अंधकार ध्वनि-सा
अस्तित्व जनाता
अनिवार कोई एक,
और मेरे हृदय की धक्-धक्
पूछती है - वह कौन
सुनाई जो देता, पर नहीं देता दिखाई !
इतने में अकस्मात गिरते हैं भीतर से
फूले हुए पलस्तर,
खिरती है चूने-भरी रेत
खिसकती हैं पपड़ियाँ इस तरह -
खुद-ब-खुद
कोई बड़ा चेहरा बन जाता है,
स्वयमपि
मुख बन जाता है दिवाल पर,
नुकीली नाक और
भव्य ललाट है,
दृढ़ हनु
कोई अनजानी अन-पहचानी आकृति।
कौन वह दिखाई जो देता, पर
नहीं जाना जाता है !
कौन मनु ?

 
आँसू के कन - जयशंकर प्रसाद | Jaishankar Prasad

वसुधा के अंचल पर

   यह क्या कन-कन सा गया बिखर !
जल शिशु की चंचल क्रीड़ा-सा
जैसे सरसिज दल पर ।

लालसा निराशा में दलमल
वेदना और सुख में विह्वल
यह क्या है रे मानव जीवन!
             कितना था रहा निखर।

मिलने चलते अब दो कन
आकर्षण -मय चुम्बन बन
दल की नस-नस में बह जाती
               लघु-मघु धारा सुन्दर।

हिलता-डुलता चंचल दल,
ये सब कितने हैं रहे मचल
कन-कन अनन्त अम्बुधि बनते
          कब रूकती लीला निष्ठुर ।

तब क्यों रे, फिर यह सब क्यों
यह रोष भरी लीला क्यों ?
गिरने दे नयनों से उज्ज्वल
             आँसू के कन मनहर
             वसुधा के अंचल पर ।

 
कही अल्लाह कही राम लिख देंगे - यतीन्द्र श्रीवास्तव

कही अल्लाह कही राम लिख देंगे !
इंक़लाब का तूफ़ान लिख देंगे !!
जितना मर्ज़ी चाहे मिटा लो दुनिया वालो !
हम ज़र्रे ज़र्रे में हिंदुस्तान लिख देंगे !!

ज़मीने बदल गई , आसमान बदल गए !
इक चादर में सोने वालो के मकाँ बदल गए !!
इस बदलाव के नाम एक पैग़ाम लिख देंगे !
हम हर उगते हुए माथे पे एक हिंदुस्तान लिख देंगे !!

सच कि तलाश में आईने निकल गए !
अँधेरा इतना गर्म था कि उजाले पिघल गए !!
हम ऐसे मौसम के नाम फ़रमान लिख देंगे !
मंदिरो कि हवाओं पे अ- सलाम लिख देंगे !!

न रहे राज़ कोई न राज़दारी रहे !
दुनिया में कुछ रहे तो ईमान और वफादारी रहे !!
हर बिगड़े हुए ईमान को बे-ईमान लिख देंगे !
हम हर जुबां पे सर ज़मीने-ए-हिंदुस्तान लिख देंगे !!

 
संवाद | कविता - रोहित कुमार 'हैप्पी'

"अब तो भाजपा की सरकार आ गई ।"
मैंने उस गुमसुम रिक्शा वाले से संवाद स्थापित किया ।

 

 

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