राष्ट्रभाषा के बिना आजादी बेकार है। - अवनींद्रकुमार विद्यालंकार

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Author:रोहित कुमार 'हैप्पी'

कलयुग

 

कलयुग में पाई है बस यही शिक्षा
हर बात पर मांगें हैं अग्नि-परीक्षा
बुद्ध भी अगर आज उतरें धरा पर
मांगे ना देगा उन्हें कोई भिक्षा।

 

#

 

शांति

 

ढूंढता रहा उसे

मंदिर में, जंगल में, कंदराओं में

पर मिली नहीं

क्योंकि...

मन अपना मैंने

खोजा ही नहीं !

 

#


मास्साब


वो हमें

पाठशाला में

हिंदी का पाठ

पढ़ाते रहे।

और...

उनके बच्चे

अंग्रेजी स्कूल में

जाते रहे!

 

#


रिश्ता

उनकी मेरी

तू-तू, मैं-मै

और...

रहती तकरार भी है

लेकिन...

तुम चाहे जो समझो

हमको उनसे प्यार भी है ।

 

#



- रोहित कुमार 'हैप्पी'

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