राष्ट्रकवि मैथिलीश्ारण्ा की जयंती के उपलक्ष्य में अधिक जानकारी पाने के लिए नेट ख्ांगाल रहा था। तभी भारत दर्शन का लिंक मिला। पत्रिका का कंटेट बेहद शानदार है। एक लेख्ा पढ़ने आया था, कई लेख्ा पड़ डाले। आपके सराहनीय काम के लिए बधाई।
भारत दर्शन पढने के बाद आज मैं अपने बचपन के दिनों में वापस लौटा. मेरी विद्यार्थी जीवन की यादें ताजा हो गईं ,जिसका पूरा श्रेय भारत दर्शन को जाता है.यह बहुत उपयोगी एवं प्रभावोत्पादक ऑनलाइन हिंदी की प्रामाणिक पत्रिका है .इसकी सफलता की दिली कामना के साथ संपादक महोदय को उनकी पूरी टीम को साधुवाद, उनके सद्प्रयासों के लिए .
भवदीय
नारायण लाल.
शिक्षक ,केंद्रीय विद्यालय
वायु सेना स्थल ,रजोकरी
नई दिल्ली -११००२७
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